लेखनी कविता -11-Jan-2023
# प्रतियोगिता
11/1/23
विषय:--मेरी डायरी
शीर्षक:-मेरी डायरी पढ़कर प्रियवर।
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मेरी डायरी पढ़कर प्रियवर,
गुमसुम न तुम होना,
मेरे जीवन की निधि इसमें,
मेरा चॉदी-सोना। टेक।
बाल सखा के हाल चाल की,
इसमें झलक मिलेगी,
कब बादल कब बिजली चमकी,
कंगन खनक खिलेगी।
हर एक पृष्ठ का सार यही,
मिल-जुल हॅसना-रोना।
मेरे जीवन की निधि इसमें,
मेरा चॉदी-सोना।1।
जबसे होश संभाला मैंने,
अपनों की पहचान हुई,
अधरों ने मुसकाना सीखा,
नजरें तीर-कमान हुईं।
उर-दीवट पर तेरी सुधि का,
मोहक रूप सलोना।
मेरे जीवन की निधि इसमें,
मेरा चॉदी-सोना।2।
स्वजनों के हर सपनों को है,
सुन्दर भाव सजाया,
भोले-भाले निर्मल मन को,
किस-किस ने ठुकराया।
बस 'हरीश', को देना प्रियतम,
निज उर-ऑगन कोना।
मेरे जीवन की निधि इसमें,
मेरा चॉदी-सोना।3।
मेरी डायरी--
रचना मौलिक एवम अप्रकाशित तथा सर्वाधिकार सुरक्षित है।
हरिश्चन्द्र त्रिपाठी 'हरीश',
रायबरेली (उ प्र) 229010
9415955693
Mahendra Bhatt
13-Jan-2023 10:43 AM
बेहतरीन
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Rajeev kumar jha
12-Jan-2023 07:27 PM
शानदार
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Abhilasha deshpande
12-Jan-2023 05:05 PM
Nice
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